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                        इंसान कि रित हर एक मनुष्य को दुसरा व्यकित धोखेबाज लगता है। भारत देश मे तो यह चरम पर है । हमे ऐतराज है उन लोगो से जो घरों लादेन और आतंकवादी की तस्वीरें लगाते है । ये वाजिब है । मगर हम लोग क्या सही है जो घरों मे आनन्दपाल और ऐसे हि अनेक लोगो को शहीद मान कर उन के लिए शोक करते है। वास्तव मे हम से गद्दारी नही छुट रही हर व्यकित गद्दार है ।